आवाज़: कोई ना रोको दिल की उड़ान को... sach hi kaha aapne ki ...
गीत की मिठास, गीत का एहसास, गीत का संदेश, और शब्दों की महत्ता को मुककमल करती है लता दीदी की मखमली आवाज़
in sab baaton ke saath burman da ke awismaraneeya sangeet ke bare me...
बर्मन-दा संगीत तैयार करने से पहले हमेशा उस संगीत को तब तक सुनते थे जब तक कि उब ना जाए. किसी ने पूछा ऐसा क्यूँ, तो दादा ने अपनी बांग्ला-हिन्दी में कहा "...हम तुबतक सुनता है, जब तक हम बोर नहीं होता..अगर बोर हुआ तो हम गाना नही बोनाता" ... यकीन मानिए, हज़ारों बार सुन कर भी बोर होने का ख़याल तक नहीं आता. बल्कि ये गीत और लता दीदी की सुरीली तान, मन को सातवें आसमान तक पहुँचा देती है; मानो इससे अच्छा कुछ नहीं. या अरबी में "सुभान अल्लाह!"
bas ye sun-padhkar kisi aur duniya me hone ka ehsaas hota hai... wah duniya jisme racha basa hai bas SIRF SANGEET
Thanks a lot for such sweet words !
aakanksha_jachak@yahoo.co.in